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विरह
तुम्हे हम चाहे
मरके भी चाहे
तुम बेवफा हो
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" उल्टा पुलटा "
जिसे ग़द्दार कहना था, उसे दिल से लगा बैठे । और जिसे दिल से लगाना था, उसे बहना बना बैठे । जिनसे चुरानी थी नज़र, उनसे नज़र मिला बैठे, और जिन...
'' इस नील गगन में ''
आजाद पंछी की तरह उड़ती रहो इस नील गगन में शर्माओ बलखाओ पास आओ अटखेलियाँ दिखाकर मन हर्षाओ मधुर कंठ से अपने जीवन की सारी खुशियां तुम बरसाओ पावन...
प्रभुजी
होकर मैं मतवाला प्रभुजी द्वार तिहारे आया हूँ नाथ करो कृपा मुझपर भी, मैं शरण तुम्हारी आया हूँ I जब भी कभी मैं संकट होता आपका...
" हे माँ "
हे माँ आपके चरणों मे अपना सीस झुकाते है जग वंदन करे माँ आपकी आपके चरणों मे अपना शीश झुकाते है
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