अब कैसे छूटी राम रट लागी
अब कैसे छूटी राम रट लागी,
साँस-साँस में नाम समा गी।
दुनिया बोली—छोड़ दे सब कुछ,
पर मन ने राम से प्रीत निभा गी।
दुख की धूप जली जब तन पर,
राम छाँव बन पास आ गी।
आँखों से जब आँसू टपके,
राम कथा बन बहती नदिया गी।
लोभ-मोह के बंधन टूटे,
जब सीता की सुधि आ गी।
हर ठोकर में सीख मिली,
हर हार में जीत जगा गी।
ना मंदिर खोजा, ना मूरत,
राम बसे हृदय की जागी।
अब कैसे छूटी राम रट लागी,
जीवन भर की यही अनुरागी।

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