मदर ऑफ ऑल डील

काग़ज़ पर स्याही चमकी, मंच पर ताली गूँजी,
नाम बड़ा था सौदे का, आवाज़ बहुत ऊँची।
कहा गया—इतिहास बदलेगा, दुनिया नई बनेगी,
पर शर्तों की परछाइयाँ, सच से आँखें चुराएंगी।

मदर ऑफ ऑल डील कहकर, सपने सबको बेचे गए,
आँकड़ों में जीत लिखी, पर ज़ख़्म कहाँ सिले गए?
मुनाफ़े की मेज़ सजी, इंसानियत पीछे छूटी,
सौदे में ताक़त जीती, पर संवेदना क्यों रूठी?

जो हार गए, उनकी चुप्पी कोई हेडलाइन न बनी,
जो जीत गए, उनकी मुस्कान भी अधूरी ही रही।
क्यों हर बड़ी डील के नीचे, छोटा सच दब जाता है?
क्यों इंसान हर बार, कीमत बनकर रह जाता है?

इतिहास गवाह है—सौदे आते, सौदे जाते,
नाम भले अमर हों उनके, दर्द सदा रह जाते।
मदर ऑफ ऑल डील नहीं, चाहिए दिलों का मेल,
जहाँ जीत में इंसान बचे—वही हो असली डील। ✨

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