गैस सिलेंडर की कतार
सुबह से लंबी कतार लगी,
धूप में सबकी आस जगी।
खाली चूल्हे की चिंता लेकर,
हर घर की उम्मीद यहाँ खड़ी।
किसी के हाथ में पर्ची है,
किसी के चेहरे पर थकान।
पर सबके दिल में एक ही चाह,
जल जाए आज घर का चूल्हा-चौका आन।
धीरे-धीरे नंबर आता है,
सबकी नजर दरवाज़े पर।
एक सिलेंडर मिलते ही जैसे,
खुशियाँ लौटें फिर से घर।
कतार भले ही लंबी हो,
उम्मीद कभी नहीं हारती।
रसोई की छोटी-सी लौ ही,
घर की खुशियाँ सँवारती। ✍️

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