“फॉर्म की कतार”

फॉर्म की कतारों में खड़ा है हिंदुस्तान,
हाथों में डिग्रियाँ, आँखों में अरमान।
माँ की उम्मीदें, पिता का भरोसा,
सरकारी नौकरी जैसे जीवन का संयोग सा।

गलियों में चर्चा बस भर्ती की होती,
चाय की दुकानों पर किस्मत की बोली लगती।
कोई कहे पेपर टल गया, कोई कहे सीटें कम,
सपनों की गठरी लेकर चलता हर युवा कदम।

किताबों में डूबे दिन, रातों में जागते सपने,
सालों की मेहनत भी कई बार रह जाए अपने।
लाखों की भीड़, पर सीटें बस थोड़ी सी,
किस्मत जैसे लिखी हो किसी ने बड़ी कंजूसी से।

माँ पूछे — “बेटा, कुछ खबर आई?”
वह मुस्काए, बोले — “अभी तैयारी जारी है भाई।”
दिल में तूफान, चेहरे पर सन्नाटा,
उम्मीद ही उसका सबसे बड़ा सहारा।

कभी तो आएगा वो दिन सुनहरा,
जब मेहनत का फल होगा सच में मेरा।
तब कहेगा ये युवा मुस्कुराकर एक बात —
“सपनों से बड़ी होती है हिम्मत की औकात।”

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