🌼 ब्रह्मचारिणी माँ 🌼
तप की ज्योति जलाए बैठी,
शांत स्वरूप सुहानी माँ।
हाथों में कमंडल माला,
ज्ञान की तुम निशानी माँ॥
नंगे पग पथ पर चलकर,
कठिन साधना की थी तुमने।
अटल विश्वास और संयम से,
जीवन राह दिखाई हमको तुमने॥
सफेद वसन की सरल छटा में,
छिपा हुआ है बल अपार।
जो भी श्रद्धा से झुके तुम्हारे आगे,
उसका हो जाता उद्धार॥
दुख हरती, सुख देती माता,
भक्ति का दीप जलाती हो।
हर अंधेरे जीवन में आकर,
उम्मीद की किरण बन जाती हो॥
हे ब्रह्मचारिणी जगदम्बा,
मन में शुद्ध विचार भरो।
तप, त्याग और सच्चे कर्मों से,
हम सबका जीवन सफल करो॥

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