नव वर्ष का संकल्प

पुराना साल चुपचाप मुड़ गया,
कुछ यादें देकर, कुछ सबक छोड़ गया।
कभी हँसी की धूप मिली,
कभी आँसू बनकर रातें भीगीं।

अब नया सवेरा दस्तक दे रहा,
हाथों में सपनों की थाली लेकर।
कह रहा—डर मत, थक मत,
बस खुद पर भरोसा रखकर चल।

जो टूटे थे, उन्हें फिर जोड़ेंगे,
जो छूटे थे, उन्हें अपनाएँगे।
हर हार को सीख बनाएँगे,
हर कोशिश को सम्मान दिलाएँगे।

नव वर्ष सिर्फ तारीख नहीं,
ये उम्मीदों की नई कहानी है।
चलो आज ये वादा कर लें—
ज़िंदगी को जीना अब हमारी ज़िम्मेदारी है।

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