सत्ता की धौंस में घिरी एक धरती, वेनेज़ुएला रोता रहा,
लोकतंत्र के नाम पर राष्ट्रपति को बेड़ियों में जकड़ा गया।
तेल की खुशबू ने इंसाफ़ को अंधा कर डाला,
महाशक्ति ने फिर एक देश का स्वाभिमान उछाला।

काग़ज़ों में आज़ादी, ज़मीं पर साज़िशों का खेल,
राष्ट्रपति बना बंदी, जनता भुगते हर पल का मेल।
इतिहास गवाह है—दादागिरी ज़्यादा दिन चलती नहीं,
जुल्म चाहे कितना भी ऊँचा हो, सच की आवाज़ दबती नहीं।

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