❄️ ठंडी हवाओं का गीत ❄️
आज सुबह जब सूरज नींद से जागा,
कोहरे के परदे से धूप ने हाथ मिलाया।
हवा की ठंडगी ने गालों को छू लिया,
ज़मीन पर हर सांस का धुआँ उभर आया।
दिल्ली की गलियों में ठंडी चुभी,
हर कदम पर शीतलहर ने दस्तक दी।
कोहरा जैसे चादर ओढ़े हुए,
हर नज़ारा धुंध में खो गया कहीं।
लेकिन इस सर्दी में एक गर्म कहानी,
चाय की प्याली, दोस्तों की जवानी।
हँसी उड़ती कड़कड़ाती सर्दी के बीच,
यादों के दीप जले, ना कोई रानी।
हवा की ये धीमी सी चाल,
ले आई कुछ मीठी बातें बेहाल।
ठंडी ने भी सिखाया एक सबक बड़ा,
गर्म दिलों से ही जीवन है उजाला।

Post a Comment