“आज बस तुम”
आज गुलाब भी शर्माए,
जब तुम मेरी तरफ़ मुस्कराए।
पंखुड़ियों में क़ैद जो न हो पाए,
वो ख़ुशबू तुम साथ लाए।
हथेली में गुलाब रखा है,
पर दिल तो कब का तुम्हें दे दिया।
एक नज़र, एक छुअन में ही
मैंने अपना हर कल तुम्हें सौंप दिया।
Rose Day बस एक दिन है,
इश्क़ तो रोज़ तुमसे होता है।
सांसों में बस नाम तुम्हारा,
और हर धड़कन तुम्हें ही चाहता है।

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