“गुलाब सा तुम”

काँटों की भीड़ में खिलता,
एक गुलाब सा तुमसे मिलना है।
बिन कहे जो सब कह जाए,
वो एहसास सा तुमसे मिलना है।

रंग तुम्हारे होठों से चुराकर
शर्माता है हर एक गुलाब,
ख़ुशबू भी पूछती है मुझसे
कैसे हो सकता है कोई इतना लाजवाब।

आज गुलाब दिया है हाथों में,
कल दिल भी थमा देंगे शायद,
क्योंकि Rose Day तो बस बहाना है,
तुमसे मोहब्बत जताने का—बेहद, बेइंतहा, बेशुमार।

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