🔔 “माँ चंद्रघंटा का आशीष” 🔔

शोभित मस्तक अर्धचंद्र,
घंटा-नाद से गूंजे अंबर,
सिंह सवारी, तेज अपार,
माँ चंद्रघंटा करतीं उद्धार।

दस भुजाओं में शक्ति विराजे,
हर संकट से भक्तों को बाजे,
खड्ग, त्रिशूल, कमल की छाया,
दूर करे हर दुःख की माया।

रणभूमि में रूप भयंकर,
भक्तों के लिए सदा सुहाकर,
घंटा की ध्वनि जब भी बजे,
भय-भूत सब दूर सजे।

शांति, साहस, प्रेम की धारा,
माँ का रूप लगे प्यारा-प्यारा,
जो भी चरणों में शीश झुकाए,
माँ उसकी नैया पार लगाए।

जय जय माँ चंद्रघंटा भवानी,
तेरी महिमा जग ने मानी,
करो कृपा हम सब पर माता,
हर लो जीवन की हर व्यथा। 🙏✨

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