🌼 कूष्मांडा माता 🌼
अष्टभुजा में सृष्टि समाई,
मंद मुस्कान में ज्योति छाई।
अंधकार को हरने वाली,
माता कूष्मांडा जग की माई।
शून्य में जब कुछ भी न था,
ना दिन, ना रात्रि, ना कोई धरा,
तब एक हंसी से रच दी दुनिया,
माता ने जग को दिया सहारा।
सूर्य मंडल में वास तुम्हारा,
तेज तुम्हारा अपार, निराला,
भक्तों के मन दीप जलाओ,
हर लो उनका हर अंधियारा।
फल-फूल से जो भोग लगाएं,
सच्चे मन से शीश झुकाएं,
उनके जीवन में सुख भर दो,
माता अपनी कृपा बरसाएं।
जय कूष्मांडा, जय जगदंबा,
तेरे चरणों में सारा अंबर,
भक्ति में जो मन रम जाए,
उसका जीवन हो जाए सुंदर। 🌺

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