कमल सिंहासन पर विराजी,
ममता की मूरत प्यारी।
स्कंद को गोद में लेकर,
करती जग की रखवाली॥
चार भुजाओं में शक्ति धरे,
भक्तों का दुःख हरती हो।
सिंह सवारी कर माँ तुम,
हर संकट को हरती हो॥
माँ का आँचल शीतल छाया,
जिसमें जग सारा सोता।
तेरे चरणों में जो झुके,
उसका भाग्य सदा ही होता॥
हे स्कंदमाता, करुणा बरसा,
हम सब पर उपकार करो।
भक्ति का दीप जले हृदय में,
जीवन को उजियार करो॥

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